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सूर्य किरण चिकित्सा: सस्ती, सरल और प्रभावशाली प्राकृतिक इलाज

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आधुनिक चिकित्सा विज्ञान जहां महंगी दवाइयों और जटिल उपचारों की ओर बढ़ रहा है, वहीं सूर्य किरण चिकित्सा एक सरल, सस्ती और प्रभावशाली प्राकृतिक उपाय के रूप में उभर रही है। इस चिकित्सा पद्धति के जरिए रंगों की शक्ति का उपयोग कर विभिन्न बीमारियों का इलाज किया जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, सूर्य की किरणों में सात रंग होते हैं— लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, बैंगनी और हल्का नीला। इन रंगों में विशेष गुण होते हैं जो शरीर के त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) को संतुलित कर विभिन्न रोगों को ठीक करने में मदद करते हैं।

कैसे काम करती है यह चिकित्सा?
इस उपचार में विभिन्न रंगों की कांच की बोतलों में पानी, तेल, ग्लिसरीन या अन्य औषधीय पदार्थ रखकर सूर्य की रोशनी में रखा जाता है। इससे उनमें संबंधित रंगों की ऊर्जा संचित हो जाती है, जिसे पीकर, मालिश कर या सांस द्वारा शरीर में पहुंचाया जाता है।

रंगों के विशेष गुण:

लाल और नारंगी रंग: यह शरीर को ऊर्जा देने वाला और सर्दी-कफ से बचाने वाला होता है। यह पाचन तंत्र को मजबूत करता है और वृद्ध लोगों के लिए टॉनिक की तरह काम करता है।

हरा रंग: यह शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकालने में मदद करता है और मानसिक संतुलन बनाए रखता है।

नीला रंग: यह ठंडा, शांति देने वाला और कीटाणु नाशक होता है। तेज बुखार, लू, अनिद्रा और सिर दर्द जैसी समस्याओं में फायदेमंद है।

सूर्य किरण चिकित्सा न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी लाभ पहुंचाती है। यह एक सस्ती और घरेलू पद्धति है, जिससे आम लोग भी बिना महंगे इलाज के स्वास्थ्य लाभ ले सकते हैं।

(Naturopathy: मीना अग्रवाल, आगरा)

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